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तुमको देखे बरसो हो गए

[su_heading size=”25″]~ तुमको देखे बरसो हो गए ~[/su_heading]

तुमको देखे बरसो हो गए
तुम कैसे इतने निष्ठुर हो गए ,

तुम बिन दिल पर क्या क्या बीती
कैसे तुम इतने संगदिल हो गये ,

एक हुए थे हम कई वादे करके
वादे सारे कैसे झूठे हो गए ,

पूछा तुम्हे जब चांद से मैंने
कहा चांद ने अब तुम रकीब के
चांद हो गए ,

पूजा तुम्हे था रब के जैसे
फिर कैसे तुम सबके जैसे हो गए ,

सोचा नहीं था मैंने तुम बिन दूजा
फिर तुम कैसे दूजे के हो गए ,

आती नहीं क्या अब याद हमारी
मेरी यादों में तुम घर क्यो कर गए ,

मिटते नहीं मुझसे ख्वाब तुम्हारे
फिर तुम कैसे किसी और के
ख्वाबों में सो गए ,

उतरते नहीं तुम हिज्र से मेरे
फिर हम कैसे तुम्हारी जिक्र से खो गए ,

बीती बातें मै भूलूं कैसे ,
बिछड़कर भी हम सिर्फ
तुम्हीं में रह गए…

– शिवम् शर्मा

रूरा, कानपुर देहात, उत्तर प्रदेश

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