
लिख रही है कलम
[su_heading size=”25″]~ लिख रही है कलम ~[/su_heading] आज का ये जहाँ पहले जैसा कहाँ, रो-रो हर दास्ताँ लिख रही है कलम। याद बचपन की वो

तुमको देखे बरसो हो गए
[su_heading size=”25″]~ तुमको देखे बरसो हो गए ~[/su_heading] तुमको देखे बरसो हो गए तुम कैसे इतने निष्ठुर हो गए , तुम बिन दिल पर क्या

दोस्ती पर कविता
~ दोस्ती पर कविता ~ दोस्त….. साँसे टूट रही थी, आस जिंदगी की छूट हो चुकी थी, पर यार था जो, साथ छोड़ने को राजी

महाभारत पर आधारित द्विपार्थ उवाच व केशव उवाच
महाभारत पर आधारित द्विपार्थ उवाच व केशव उवाच ~ द्विपार्थ-उवाच् ~ धरती की कोख में बीज युद्ध के बोकर हँस रहे हो सखा सबकी आँख

श्री राम कविता
भगवान श्री राम के संघर्षशील जीवन को समर्पित कविता – श्री राम कविता राम होना भी कोई खेल नही सिर्फ नीति धर्म का ही मेल

तुम्हारे साथ होने का एहसास
[su_heading size=”25″]~ तुम्हारे साथ होने का एहसास ~[/su_heading] तुम्हारे साथ होने का एहसास अलग ही होता है आभास ही नहीं होता मुझे किसी भी दुःख

अब तुम ही हो
“अब तुम ही हो” जब भी तुमसे मै मिलती हूँ ऐसा लगता है के जैसे तुम ही हो मेरी दुनिया मेरा सबकुछ अब तुम ही
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तुम्हारे साथ होने का एहसास
[su_heading size=”25″]~ तुम्हारे साथ होने का एहसास ~[/su_heading] तुम्हारे साथ होने का एहसास अलग ही होता है आभास ही नहीं होता मुझे किसी भी दुःख

निराशाओं के आसमान में
[su_heading size=”25″]“निराशाओं के आसमान में”[/su_heading] निराशाओं के आसमान में जब आशा का कोई बादल नजर आता , तब तक मनुष्य के हाथ से सारा अवसर

लिख रही है कलम
[su_heading size=”25″]~ लिख रही है कलम ~[/su_heading] आज का ये जहाँ पहले जैसा कहाँ, रो-रो हर दास्ताँ लिख रही है कलम। याद बचपन की वो

दोस्ती पर कविता
~ दोस्ती पर कविता ~ दोस्त….. साँसे टूट रही थी, आस जिंदगी की छूट हो चुकी थी, पर यार था जो, साथ छोड़ने को राजी

महाभारत पर आधारित द्विपार्थ उवाच व केशव उवाच
महाभारत पर आधारित द्विपार्थ उवाच व केशव उवाच ~ द्विपार्थ-उवाच् ~ धरती की कोख में बीज युद्ध के बोकर हँस रहे हो सखा सबकी आँख

श्री राम कविता
भगवान श्री राम के संघर्षशील जीवन को समर्पित कविता – श्री राम कविता राम होना भी कोई खेल नही सिर्फ नीति धर्म का ही मेल


