sangarsh-karo
कविता
ज्ञानेंद्र कुमार सूर्य

संघर्ष करो

निर्धारित अपना लक्ष्य कर सशक्त अपना संकल्प करो परिस्थितियां प्रतिकूल है संघर्ष करो संघर्ष करो। अपने ऊपर विश्वास करो अच्छा करो कुछ खास करो वक्त

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ye-bharat-bhu-ki-mati-hai
कविता
ज्ञानेंद्र कुमार सूर्य

यह भारत भू की माटी है

कण कण पवित्र बुंद बुंद अमृत बालक श्री राम कन्या सीता सदृश्य समान गौरवशाली इतिहास जहाँ का सुंदर प्यारी परिपाटी है यह भारत भू की

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me-ek-boodha-hu
कविता
ज्ञानेंद्र कुमार सूर्य

मैं एक बूढ़ा हूं

मनुष्य के बुढ़ापे की अवस्था का सचित्र वर्णन करती ज्ञानेंद्र कुमार सूर्य की बुढ़ापे पर कविता मेरा बचपन खो गया यौवन साथ छोड़ गया शक्ति

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