
लिख रही है कलम
[su_heading size=”25″]~ लिख रही है कलम ~[/su_heading] आज का ये जहाँ पहले जैसा कहाँ, रो-रो हर दास्ताँ लिख रही है कलम। याद बचपन की वो

[su_heading size=”25″]~ लिख रही है कलम ~[/su_heading] आज का ये जहाँ पहले जैसा कहाँ, रो-रो हर दास्ताँ लिख रही है कलम। याद बचपन की वो

[su_heading size=”25″]~ तुमको देखे बरसो हो गए ~[/su_heading] तुमको देखे बरसो हो गए तुम कैसे इतने निष्ठुर हो गए , तुम बिन दिल पर क्या
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