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हिंदुत्व की प्यारी “हिंदी”

हिंदुत्व की प्यारी “हिंदी”

हिंदुत्व की प्यारी हिंदी
रज रज मैं बसी हुई है
शब्दकोश का भंडारण
सरलता से भरी हुई ।

हिंदी है अनुभवों की बिंदी
यह हिंद का अभिमान है
मात्र हमारी भाषा नहीं ये
“भारत” माता समान है ।

कितने युग बीते हिंदी में
जाने कितने इतिहास पुराने हैं,
देवनागरी लिपि है जिसकी
हिंदी भाषा हमारी शान।

यू तो हिंद की बगिया में
कई भाषाओं के फूल लगे
मातृभाषा हिंदी है प्यारी
जैसे नीर में कमल खिले।

रची बसी है हिंदी में दुनिया
रूप रस छंद गीत कहानी मैं
कितने किरदार आए हिंदी में
यह सालों साल पुरानी है।

बहुत बोली फिरंगी बोली
अब हिंदी का मान करें
बोले और बुलाए हिंदी में
हिंदी का सम्मान करें।

आओ नवयुग का निर्माण करें
इसमें हिंदी को प्रथम रखें
मातृ भाषा है हिंदी अपनी
सब मिलकर सम्मान करें।

हिंदी है हिंद की बोली
जैसे मीठी मुस्कान हो भोली
भारत माता की जय है जैसे
अब हिंदी की जय – जय कार करे।

– प्रतिभा दुबे ‘स्वतंत्र लेखिका’

ग्वालियर, मध्यप्रदेश

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